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17 अक्तूबर - कुरूक्षेत्र
विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र के भूगोल विभाग द्वारा किए गए
सर्वेक्षण के आधार पर अन्य जिलों के किसानों की तुलना में
सिरसा जिला के किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर पाई गई है।
गत एक सप्ताह से भी अधिक समय तक सिरसा जिला में सर्वेक्षण
के लिए आए लगभग पांच दर्जन छात्रों की टीम द्वारा जिला में
किसानों की स्थिति पर सामाजिक व आर्थिक सर्वेक्षण किया गया।
भूगोल विभाग के विद्यार्थियों की इस टीम में तीन दर्जन से
अधिक छात्र और 16 छात्राएं थीं। विद्यार्थियों की इस टीम
के साथ विभाग की तरफ से डा. राजेश्वरी और डा. ओमवीर सिंह
थे।
डा. राजेश्वरी के अनुसार टीम ने जिला के विभिन्न गांवों
में दौरा किया और उमेदपुरा गांव में किसानों से बातचीत करके
तथा फसल की स्थिति व उत्पादन के आंकड़ों के डाटा के आधार
पर सर्वे का कार्य किया। इस सर्वेक्षण में उन्होंने चार सौ
परिवारों में जाकर लोगों से बातचीत की और फसल उत्पादन की
स्थिति के साथ-साथ भूमि वितरण, ग्रामीणों की शिक्षा व
स्वास्थ्य, बच्चों व माताओं की खान-पान की स्थिति, टीकाकरण
व ग्रामीणों के रहन-सहन की स्थिति का भी सर्वे किया। डा.
राजेश्वरी के अनुसार सिरसा के गांव उमेदपुरा सहित अन्य
गांव में भी स्वच्छता और स्ट्रीट लाइटों की स्थिति बेहतर
मिली। स्ट्रीट लाइटों में सोलर लाइटें शामिल थीं। सोलर
लाइट के मामले में वैसे भी सिरसा देश का पहला जिला है जहां
सभी गांवों में सोलर लाइट स्थापित की जा चुकी है। उन्होंने
बताया कि छात्रों की इस टीम ने विभाग द्वारा दिए गए एक
दर्जन से भी अधिक विषयों पर सर्वे किया है। टीम द्वारा पहले
भी अन्य जिलोंं का दौरा किया गया। सिरसा में किए सर्वे के
आधार पर लगभग सभी विषयों में जिला को बेहतर पाया गया। जिला
में लैंड हॉल्डिंग की स्थिति को देखते हुए जिला के किसानों
की आर्थिक स्थिति भी मजबूत पाई। आर्थिक स्थिति के मामले
में लिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि गेहूं व कपास
उत्पादन के मामले मेें सिरसा जिला न केवल हरियाणा में बल्कि
देश के अव्वल जिलों में शुमार है।
सिरसा जिला गत सीजन में प्रति हैक्टेयर गेहूं उत्पादकता के
मामले में न केवल प्रदेश में बल्कि देश में प्रथम स्थान पर
रहा है जिसकी बदौलत पूरे प्रदेश में गेहूं उत्पादकता की दर
में रिकॉर्ड इजाफा हुआ है। इसी आधार पर इस बार राष्ट्रीय
स्तर पर गेहूं फसल के रिकॉर्ड उत्पादन में राष्ट्रीय कृषि
अवार्ड के लिए हरियाणा राज्य को चुना गया है। सिरसा जिला
में गेहूं का उत्पादन 14 लाख मीट्रिक टन से भी पार कर गया
है। कृषि विभाग के अनुसार प्रति हैक्टेयर गेहूं उत्पादकता
की दर 50.50 क्विंटल रही है जबकि प्रदेश में गेहूं
उत्पादकता प्रति हैक्टेयर की दर 46.24 क्विंटल रही है।
उन्होंने बताया कि गत रबी सीजन में हरियाणा में 116.30 लाख
मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई जबकि पैदावार इससे कहीं अधिक
हुई है। प्रदेश में 25 लाख 12 हजार हैक्टेयर भूमि में गेहूं
की फसल की बिजाई की गई। राज्य सरकार की किसान हितैषी नीति
के चलते तथा कृषि विभाग के बेहतर कार्यक्रमों के कारण गेहूं
उत्पादकता में रिकॉर्ड इजाफा हुआ है जिससे गेहूं उत्पादन
में राज्य का नाम प्रथम स्थान पर आया है। इसी के
परिणामस्वरूप हरियाणा को गेहूं उत्पादन के मामले में गत 16
जुलाई को राष्ट्रीय अवार्ड से नवाजा जा चुका है।
उन्होंने बताया कि जिला की विभिन्न मंडियों में गत वर्ष
800 करोड़ से भी अधिक की कपास फसल की बिक्री हुई जिससे
किसानों के चेहरों पर और रौनक तो आई ही है प्रदेश के
राजस्व में बढ़ौतरी होने से राज्य के विकास को भी गति मिली
है। कपास फसल के उत्पादन से जहां राज्य के राजस्व में
रिकॉर्ड वृद्धि हुई वहीं जिला में विभिन्न क्षेत्रों में
व्यापार की संभावनाएं भी बढ़ी है। इसके साथ-साथ सिरसा
प्रदेश का पहला ऐसा जिला हैै जिसमें प्रगतिशील किसानों की
सं या 4 दर्जन से भी अधिक हो गई है। इससे पूर्व दो दर्जन
से भी अधिक थी। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न
किसान हितैषी नीतियों का किसानों ने भरपूर फायदा उठाया है।
सरकार की इन नीतियों की बदौलत किसानों की सं या 50 तक
पहुंच गई है जो प्रदेशभर में सर्वाधिक है। इससे पहले भी
प्रगतिशील किसानों की सं या 32 थी उस समय भी सिरसा जिला
हरियाणा राज्य में प्रथम स्थान पर था। प्रगतिशील किसान
नवीनतम तकनीकों का प्रयोग करके स्वयं की आय में इजाफा कर
रहे हैं। साथ ही जिला व प्रदेश की राजस्व बढ़ाने में अहम
भूमिका निभा रहे हैं। सिरसा जिला के बाद प्रगतिशील किसानों
की सं या में रोहतक जिले का नंबर आता है जबकि सोनीपत जिला
तीसरे स्थान पर है। |
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